सूचना संचार क्रांति

बिट-बाइट और अभिकेंद्रित परिपथ का चमत्कार
बदल दिया सबकुछ ऐसा अद्भुत यह आविष्कार।

सूचना सम्पर्क की अब तो बह रही बयार
टेलीफोन समा गये मुट्ठी में होकर बेतार।

बेकार हो रहे हैं देख लो, पुराने सभी तंत्र
स्मार्ट होने लगे हैं छोटे-बड़े घर के सारे यंत्र।

बुक करो, गाड़ी बुलाओ या फिर मंगाओ सामान
ऑनलाइन हो गया सबकुछ, कितना है आसान।

इंटरनेट का फैल गया यह मायावी जाल
अच्छा है कि बुरा, उलझन भरा है काल।

कॉल, विडिओ या चैटिंग में अबाल-वृद्ध मस्त
पल में इधर की उधर तो अफवाहों से भी पस्त।

सूचना और ज्ञान-सुलभ बन गया है संसार
अफवाहों की भी लेकिन भरपूर है पैदावार।

सूक्ष्म तरंगों से प्रवाहित अब विचार होने लगे हैं
सिमट रही है दुनिया, लोग करीब आने लगे हैं।


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