आओ मिलकर लड़ें कोरोना से जंग
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आँखों से दिखता नहीं, पर है कठिन प्रहार।
आज हिलाकर रख दिया, सकल विश्व व्यापार।।
किसको इसका दोष दूँ, किसका कहूँ गुनाह।
बिगड़ रहे हालात हैं, सुन-सुनकर अफवाह।।
डर के मारे छुप गए, घुटकर भरते आह।
बंद घरों से झाँकते, जीने की है चाह।।
कोरोना के नाम से, सांसत में है जान।
पल-पल आती है निकट, जालिम बेईमान।।
बंद पड़ा बाजार है, धंधे सारे मंद।
उलटे-सीधे रच रहे, घर के अंदर छंद।।
मंदिर, मस्जिद ठप हुए, बंद पड़े बाजार ।
कहना मानो आप भी, ठहरो घर पर यार।।
जाना जो बाहर पड़े, मास्क रखो तब साथ।
लेकर साबुन ठीक से, साफ करो फिर हाथ ।।
हो चुका है खेल बहुत, हो जाओ तैयार।
कोरोना का अब नहीं, होने दो विस्तार।।
आगामी बाईस को, रहिये घर में बंद।
कोरोना को रोकिये, तोड़ें इसका फंद।।
बाहर बस तब आइये, पाँच बजे जब शाम।
शुकराना तब गाइये, सेवक सबके नाम।।
नर्स चिकित्सक को समझ, असली हीरो आज।
ताली देकर अब करे, उनका नमन समाज।।
सूझ-बूझ की बात है, मानो कहना आप।
हलके में लेना नहीं, होगा यह तो पाप।।
सर्दी, खाँसी संग में, आये यदि बुखार।
साँसों में अवरोध हो, पड़े जांच दरकार।।
डरने की है बात पर, रहो धैर्य के साथ।
बचना इससे आप है, सबकुछ अपने हाथ।।
देखे दुनिया फिर हमें, रह जायें सब दंग।
मिलकर सब जन साथ में, आज लड़ें यह जंग।।