विषय - चित्रलेखन
विधा - गीत
बड़े प्रेम से लिखकर पाती, तुमने मुझे बुलाया
इस निर्जन प्रदेश को किसने, रंगों से भरमाया …
धीरे-धीरे साँझ ढली है, चहक रही है क्यारी
सपनों की बारात सजी है, महक उठी फुलवारी।
उमंगों की झंकार गुंजित, प्रीत छुपाकर लाया …
धरनी अंबर के मिलने का, शुभ अवसर लगता है
बिना कहे कुछ भी सबकुछ तो, सुना हुआ लगता है।
दूर-दूर तक दिखे नहीं है, किसी जीव की छाया …
हर तरफ हैं रश्मियाँ पसरी, करतीं ज्यों अभिवादन
बंद आँखों से कर जरा तू, तृप्ति भरा आस्वादन।
दुनिया की नजरों से बचकर, पुष्प छुपाकर लाया …
कितना सूना सा था पहले, धरती का यह कोना
तुमने आकर बसा दिया है, करके जादू टोना।
रंगों से आबाद हो गया, सुंदर कितनी माया …
विधा - गीत
बड़े प्रेम से लिखकर पाती, तुमने मुझे बुलाया
इस निर्जन प्रदेश को किसने, रंगों से भरमाया …
धीरे-धीरे साँझ ढली है, चहक रही है क्यारी
सपनों की बारात सजी है, महक उठी फुलवारी।
उमंगों की झंकार गुंजित, प्रीत छुपाकर लाया …
धरनी अंबर के मिलने का, शुभ अवसर लगता है
बिना कहे कुछ भी सबकुछ तो, सुना हुआ लगता है।
दूर-दूर तक दिखे नहीं है, किसी जीव की छाया …
हर तरफ हैं रश्मियाँ पसरी, करतीं ज्यों अभिवादन
बंद आँखों से कर जरा तू, तृप्ति भरा आस्वादन।
दुनिया की नजरों से बचकर, पुष्प छुपाकर लाया …
कितना सूना सा था पहले, धरती का यह कोना
तुमने आकर बसा दिया है, करके जादू टोना।
रंगों से आबाद हो गया, सुंदर कितनी माया …
