जमाना कितना बदल गया है
मां ने कहा, पढ़ लिया करो
बेटा कूदने को छत पर चला गया।
बाप ने कहा, वक्त पर घर आ जाया करो
बेटी घर छोड़ कर चली गई।
ना जाने, क्यों! मगर ऐसा ही हो गया है
वक्त को मानों पंख लग गया है।
कल ही तो बेटा छोड़ कर गया था
आज ही बाप का कूल्हा खिसक गया है।
कल ही पाँव फिसले थे उनके
आज ही कूड़ेदान पर फेंककर चले गये हैं।
मां ने कहा, पढ़ लिया करो
बेटा कूदने को छत पर चला गया।
बाप ने कहा, वक्त पर घर आ जाया करो
बेटी घर छोड़ कर चली गई।
ना जाने, क्यों! मगर ऐसा ही हो गया है
वक्त को मानों पंख लग गया है।
कल ही तो बेटा छोड़ कर गया था
आज ही बाप का कूल्हा खिसक गया है।
कल ही पाँव फिसले थे उनके
आज ही कूड़ेदान पर फेंककर चले गये हैं।