.
कैसे भुला दूँ इतिहास की उन बाजियों की बात
किसको सुनाऊँ अंतर्तम की तन्हाइयों की बात ।
यूँ तो मारे फिरते हैं बहुत चाहने वाले मेरे भी
कौन करेगा मगर यहाँ मेरी सिसकियों की बात ।
जुर्म में है मुब्तला जब शहर का कोतवाल ही
कौन सुनेगा फिर यहाँ उन साजिशों की बात ।
नजीरें हैं बहुत हैं दर-पेश दीन-ओ-धरम की
करता है नहीं कोई असल गुनहगारों की बात ।
जी करता है 'सुन' बन जाऊं फिर क्यों ना बच्चा
करता रहूँ भर दिन यूँ ही नादानियों की बात।
कैसे भुला दूँ इतिहास की उन बाजियों की बात
किसको सुनाऊँ अंतर्तम की तन्हाइयों की बात ।
यूँ तो मारे फिरते हैं बहुत चाहने वाले मेरे भी
कौन करेगा मगर यहाँ मेरी सिसकियों की बात ।
जुर्म में है मुब्तला जब शहर का कोतवाल ही
कौन सुनेगा फिर यहाँ उन साजिशों की बात ।
नजीरें हैं बहुत हैं दर-पेश दीन-ओ-धरम की
करता है नहीं कोई असल गुनहगारों की बात ।
जी करता है 'सुन' बन जाऊं फिर क्यों ना बच्चा
करता रहूँ भर दिन यूँ ही नादानियों की बात।