नियम से आबद्ध

नियम से आबद्ध

सात रंगों के घोड़ों पर सवार
समुंदर से निकल वह आता है प्रच्छन्न
आनंद की सौगात लिए
उजाले बाँटता है
घास पर पड़ी ओस की बूंदों को
सहेज लेता है
दिन भर अटखेलियाँ करता है बादलों के साथ।
सर्वत्र भर देता है
ऊर्जा और जोश।
प्रफुल्लित हो उठता है
छोटा सा बच्चा
फैलाता है नन्हीं बाहें
कितनी आतुरता दिखलाता है!

कंधे से कंधा मिला कर चलता है
युवा श्रमिक।
बुढ़ापे की मायूसी
उसे रोक लेना चाहती है।
मगर उसे तो जाना ही होगा
नियम से बंधा है वह।
जाएगा तभी तो आएगा
और मिल पाएगा
प्रतीक्षा में रत ओस की बूंदों से
नन्हीं किलकारियों से
युवा उम्मीदों से
और छोड़ जाएगा जर्जर काया
सख्त नियम से आबद्ध।

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