लगाकर पंख अरमानों के
भर तू ऊँची उड़ान
बन अभय न डर
लहरा के आसमान में
जी भर के ले तू
लय भरी उड़ान
गुणों की खान तू
ले रस की उड़ान
छेड़ सुरों की तान
ले कला की उड़ान।
न आयेंगे दिन ये बारबार
ले सम्हाल जो है आज
कल के लिए न छोड़ देना आज
कल के लिए न रोना कभी
खुल के जी ले
कर ले तू मन की सभी
मगर न छोड़ना कभी
सपनों की उड़ान
बन अभय न डर
लहरा के आसमान में
जी भर के ले तू
लय भरी उड़ान
गुणों की खान तू
ले रस की उड़ान
छेड़ सुरों की तान
ले कला की उड़ान।
न आयेंगे दिन ये बारबार
ले सम्हाल जो है आज
कल के लिए न छोड़ देना आज
कल के लिए न रोना कभी
खुल के जी ले
कर ले तू मन की सभी
मगर न छोड़ना कभी
सपनों की उड़ान