रधिया सुगिया कहो या
गंगा जमुनी दे दो नाम।
आसपास कई घरों में
करते रहते नित काम।
आसपास कई घरों में
करते रहते नित काम।
काम हमारा किसी को भाए
कोई हरदम मीनमेख निकाले।
कोई पूछे पड़ोसी का हाल
दोष अपना कोई हम पर डाले।
कोई हरदम मीनमेख निकाले।
कोई पूछे पड़ोसी का हाल
दोष अपना कोई हम पर डाले।
रंग-रंगीले दुनिया के ढंग
बहू लाते ही हमें निकाले।
लाल कई ऐसे भी देखे
माँ को लाकर हमें धकेले।
बहू लाते ही हमें निकाले।
लाल कई ऐसे भी देखे
माँ को लाकर हमें धकेले।
पति से भी ज्यादा
हमपर रखे निगाह।
ओह! बेचारी, कितनी
हसरत से भरती आह!
हमपर रखे निगाह।
ओह! बेचारी, कितनी
हसरत से भरती आह!
कोई भागे काम पर
कोई दिन भर सड़ती
ठसक में कमी लेकिन
रत्ती भर भी कहाँ करती!
कोई दिन भर सड़ती
ठसक में कमी लेकिन
रत्ती भर भी कहाँ करती!
हमारा तो यह धंधा है
माना कि गैरत कम है
परिवार अपना मगर
इसी पर तो पलता है।
माना कि गैरत कम है
परिवार अपना मगर
इसी पर तो पलता है।