एक गट्ठर सिर पे डाल
घूम रहा गली-गली
गले फाड़ आवाजें करता
मोलभाव और हुज्जत हवाले सहता
दो वक्त रोटी की खातिर
कितने सारे पापड़ बेलता।
खड़ा दिवाकर ऊपर
गुस्से में होकर लाल
हालत और भी करता बदहाल
पसीने से हुआ बुरा हाल।
भेजो अब तो एक टुकड़ा बादल का
मिले तो कहीं एक कोना छाँह का
मिले सहारा उसको
जो बने सहारा खुद का
वो जो दीन-हीन
दुखी और दमित हैं।
निराश नहीं होना खुद से कभी
रुक न जाना कभी।
फेरीवाले का प्रण देखो
अभी इधर, कभी किधर
यात्रा है निरंतर।
जो दुत्कार दिया किसी ने
तो कभी किसी ने प्यार दिया
उम्मीद का दिया ले कर
आशा की लौ को कभी
मद्धम न होने दिया
क्योंकि इस दुनियाँ में
जो हार गया स्व से
उसका कौन सहारा है!
घूम रहा गली-गली
गले फाड़ आवाजें करता
मोलभाव और हुज्जत हवाले सहता
दो वक्त रोटी की खातिर
कितने सारे पापड़ बेलता।
खड़ा दिवाकर ऊपर
गुस्से में होकर लाल
हालत और भी करता बदहाल
पसीने से हुआ बुरा हाल।
भेजो अब तो एक टुकड़ा बादल का
मिले तो कहीं एक कोना छाँह का
मिले सहारा उसको
जो बने सहारा खुद का
वो जो दीन-हीन
दुखी और दमित हैं।
निराश नहीं होना खुद से कभी
रुक न जाना कभी।
फेरीवाले का प्रण देखो
अभी इधर, कभी किधर
यात्रा है निरंतर।
जो दुत्कार दिया किसी ने
तो कभी किसी ने प्यार दिया
उम्मीद का दिया ले कर
आशा की लौ को कभी
मद्धम न होने दिया
क्योंकि इस दुनियाँ में
जो हार गया स्व से
उसका कौन सहारा है!