उजाले की चुभन

नहीं होती सहन, उजाले की चुभन,
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

नहीं चाहिए मुझे, उजाले की लपट,
जला दे जो मेरा, छोटा सा आशियाँ।
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

चुकाई है हमने, कीमत रोशनी की,
गरीबी को चिढ़ाती, सतरंगी रोशनियाँ।
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

फटे हैं वस्त्र, बेपर्दा करती निगाहें,
बेशर्म निगाहें या, उजाले का है क़ुसूर!
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

भरी थी महफिल, था प्रतिबद्ध मौन,
होता रहा चीर-हरण, पथरा गई निगाहें!
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

वो,जो, दिये जलाते हैं, रोशनी जुटाते हैं,
दिखता कहाँ उन्हें, चिराग तले अंधेरा घना!
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

दूभर ज़िंदगी जब, मांगने लगे मौत उधार,
रोक लो उजाले की बर्छी, छाने दो अंधकार!
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

आज भी न मिला कोई काम, दिन ढले जब करता बखान,
बुझती माँ की आशा की लौ, कहती है यही बस बार-बार!
लौटा दो मुझको, घना अंधेरा मेरा।
लौटा दो मुझको, मेरा अंधेरा घना।

SOME RAW MOMENTS NAMED POETRY

आशा
रात बहुत अंधियारी है
पर सुबह तो होगी.
उजड़ा चमन, आज पतझड़ है
पर बसंत आने को है.
सर्दी बहुत है, ठिठुर रहे हाथ-पांव
कर लेंगे इंतजार, गर्मी आने को है.
फिसलती रही मंजिलें अब तक आ-आकर पास
तस्वीर साफ है, बस एक और प्रयास.
'हे राम' पर ढेर हो गया महात्मा
राम राज्य की बुनियाद वही है.
है बहुत भागम भाग आज
सुकून भरे दिन आने को हैं.
 मत मसलो कोंपलों को आज ही
इनके भी दिन आने को हैं.
चौड़े कंधे कंस के बहुत
मर्दन कर इनका कान्हा मुस्काने को है.
हुई हमारी जग-हँसाई बहुत
अब सम्मान पाने की बारी है.


लगता है कोरोना अब जाने लगा है

  लगता है कोरोना अब जाने लगा है बेचैनी सी हर तरफ छाने लगी है  बंदिशें अब यंत्रणा लगने लगी है  बादल निराशा के गहराने लगे हैं  सड़कों पर वाहन फ...