नववर्ष - विक्रमी संवत 2075
नव तरु पल्लव
मधुर आम्र मंजरी
गदरा गए पलाश
बदल गए कलेवर
गुलमोहर मनोहर झूमे
मादक लगे अमलतास
धरती का श्रृंगार नया
धवल हो गया चंद्र रवि
नवरात्री का आरम्भ है
नववर्ष का प्रारम्भ है
खुशियों का अम्बार हो
नूतन उत्साह हो
दूर हों कलुषित विचार
मृदुल हों सवर्त्र उद्गार
आनंद अमृत रसधार हो
नव संवत्सर
विक्रमी संवत 2075
अनुपम श्रीगणेश हो