सख्त व्यवस्था
एक मेट्रो स्टेशन की सीढ़ियों पर सुबह नौ बजे, एक टांग वाला लाचार व्यक्ति बिखरा पड़ा था और आने जाने वाले यात्रियों से दर्दनाक आवाज में दया की अपील कर रहा था।
दोपहर बाद के दो बजे, उसी जगह, आठ-दस सीढियाँ ऊपर मैले-कुचैले कपड़ों में एक औरत, एक बेसुध से बच्चे को लेकर बैठी थी और आनेजाने वाले की आत्माओं को झकझोर रही थी।
रात्रि के नौ बजे, वहीं, चंद सीढ़ियाँ ऊपर या नीचे, एक दीन-हीन असहाय सी बूढी औरत लोगों को पुण्य के लिए ललकारती पाई जाती है।
परिसर में सीसीटीवी सहित …. गहन निगरानी व्यवस्था है। प्रतीत होता है, सुरक्षा एजेंसी की ही तरह इनकी भी पाली बदलती है सख्त निरीक्षण में।
एक मेट्रो स्टेशन की सीढ़ियों पर सुबह नौ बजे, एक टांग वाला लाचार व्यक्ति बिखरा पड़ा था और आने जाने वाले यात्रियों से दर्दनाक आवाज में दया की अपील कर रहा था।
दोपहर बाद के दो बजे, उसी जगह, आठ-दस सीढियाँ ऊपर मैले-कुचैले कपड़ों में एक औरत, एक बेसुध से बच्चे को लेकर बैठी थी और आनेजाने वाले की आत्माओं को झकझोर रही थी।
रात्रि के नौ बजे, वहीं, चंद सीढ़ियाँ ऊपर या नीचे, एक दीन-हीन असहाय सी बूढी औरत लोगों को पुण्य के लिए ललकारती पाई जाती है।
परिसर में सीसीटीवी सहित …. गहन निगरानी व्यवस्था है। प्रतीत होता है, सुरक्षा एजेंसी की ही तरह इनकी भी पाली बदलती है सख्त निरीक्षण में।