लघुकथा - इशारा

इशारा

रोज की तरह वह आज भी ऑफिस के लिए घर से निकली। कॉलोनी के फाटक से निकलते ही दो आवारा किस्म के लड़के भद्दी सी सूरत से  भद्दे इशारे करते आज भी दिखे।

पास ही दो-चार आवारा कुत्ते भी रोज की तरह ही झाँव-झाँव करते हुए भी मिल गए। लड़की ने आज फैसला कर लिया था शायद, आव देखा न ताव और एक पत्थर उठाकर दे मारा। कुत्ते दुम दबाकर भाग खड़े हुए ...... लड़के भी ...... इशारा समझ चुके थे।

लगता है कोरोना अब जाने लगा है

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