श्मशान मात्र एक स्थान नहीं
मुक्ति का धाम है अंतिम
आत्मा तज कर मानव काया
अहिर्निश और अनंत यात्रा का
करती है अनुगमन।
सिद्धपीठ है श्मशान
जहाँ सत्य की परीक्षा दी
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने
महायोगी शिव करते ध्यान
मां छिन्नमस्तिका के रौद्र नर्तन का
साक्षी है यह श्मशान।
जीवन भर की कमाई का
लेखाजोखा है श्मशान का काला धुआं।
अट्टहास करता है काल यहाँ
और पूछता है
क्या लेकर आये थे जग में
जा रहे क्या लेकर!
मानोपमान, व्यवहार, उपार्जन
रह जाते हैं यहीं धरे
कर्मों की काठी पर सजकर
वो देखो चला बराती।
मुक्ति का धाम है अंतिम
आत्मा तज कर मानव काया
अहिर्निश और अनंत यात्रा का
करती है अनुगमन।
सिद्धपीठ है श्मशान
जहाँ सत्य की परीक्षा दी
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने
महायोगी शिव करते ध्यान
मां छिन्नमस्तिका के रौद्र नर्तन का
साक्षी है यह श्मशान।
जीवन भर की कमाई का
लेखाजोखा है श्मशान का काला धुआं।
अट्टहास करता है काल यहाँ
और पूछता है
क्या लेकर आये थे जग में
जा रहे क्या लेकर!
मानोपमान, व्यवहार, उपार्जन
रह जाते हैं यहीं धरे
कर्मों की काठी पर सजकर
वो देखो चला बराती।
सुनील कुमार झा