प्रगति गान

तरक्की की राहों में
होती हैं बाधायें बहुत 
मगर आगे बढ़ने वाले को

रोक सका है कौन!

छोटी-छोटी खुशियाँ
जो रोज संजोता है 
एक दिन उसका संसार
खुशियों से भर जाता है।

रोना-धोना छोड़ कर अब तो
गिले-शिकवे भूलकर सारे
आओ हाथ बढ़ायें मिलकर
सहारा एक दूजे का बन जायें।

जात-पाँत और ऊँच-नीच
हिंदू-मुस्लिम का तज कर भाव
आओ सब मिल कर रच दें
हिंदुस्तान का एक नया राग।

लगता है कोरोना अब जाने लगा है

  लगता है कोरोना अब जाने लगा है बेचैनी सी हर तरफ छाने लगी है  बंदिशें अब यंत्रणा लगने लगी है  बादल निराशा के गहराने लगे हैं  सड़कों पर वाहन फ...