तरक्की की राहों में
होती हैं बाधायें बहुत
मगर आगे बढ़ने वाले को
रोक सका है कौन!
छोटी-छोटी खुशियाँ
जो रोज संजोता है
एक दिन उसका संसार
खुशियों से भर जाता है।
रोना-धोना छोड़ कर अब तो
गिले-शिकवे भूलकर सारे
आओ हाथ बढ़ायें मिलकर
सहारा एक दूजे का बन जायें।
जात-पाँत और ऊँच-नीच
हिंदू-मुस्लिम का तज कर भाव
आओ सब मिल कर रच दें
हिंदुस्तान का एक नया राग।
होती हैं बाधायें बहुत
मगर आगे बढ़ने वाले को
रोक सका है कौन!
छोटी-छोटी खुशियाँ
जो रोज संजोता है
एक दिन उसका संसार
खुशियों से भर जाता है।
रोना-धोना छोड़ कर अब तो
गिले-शिकवे भूलकर सारे
आओ हाथ बढ़ायें मिलकर
सहारा एक दूजे का बन जायें।
जात-पाँत और ऊँच-नीच
हिंदू-मुस्लिम का तज कर भाव
आओ सब मिल कर रच दें
हिंदुस्तान का एक नया राग।