उम्र की दुश्वारियां गले लगाने लगे हैं
दिन बचपन के याद आने लगे हैं।
राहतें बँटनी फिर से शुरू हो गई हैं
लगता है चुनाव के डर सताने लगे हैं।
सैलाब-ए-नफरत छिपाये फिरने वाले
अचानक से मुस्कुराना डराने लगे हैं।
खुद से भी ज्यादा भरोसा किया था
ताज्जुब है, मुझे ही आजमाने लगे हैं।
अदृश्य शक्तियों का सहारा ढूंढने लगे
नाकामियों की सदायें रुलाने लगे हैं।
जा बसे परदेस सबकुछ लूटकर वो
तमाशबीन मलामतें बरसाने लगे हैं।
बदलने वाली नहीं फिजा 'सुन' इनसे
कोरे वादे इनके अब हँसाने लगे हैं।
दिन बचपन के याद आने लगे हैं।
राहतें बँटनी फिर से शुरू हो गई हैं
लगता है चुनाव के डर सताने लगे हैं।
सैलाब-ए-नफरत छिपाये फिरने वाले
अचानक से मुस्कुराना डराने लगे हैं।
खुद से भी ज्यादा भरोसा किया था
ताज्जुब है, मुझे ही आजमाने लगे हैं।
अदृश्य शक्तियों का सहारा ढूंढने लगे
नाकामियों की सदायें रुलाने लगे हैं।
जा बसे परदेस सबकुछ लूटकर वो
तमाशबीन मलामतें बरसाने लगे हैं।
बदलने वाली नहीं फिजा 'सुन' इनसे
कोरे वादे इनके अब हँसाने लगे हैं।