अंधेरी रात में
आसमान को निहारता है
और तारों को गिनता है
एक या एक और दो
टिमटिमाते से तारे को
पकड़ लेना चाहता है
बच्चा है, नादान है
सबकुछ सहेज लेना चाहता है
धरती से आकाश को
नन्हें कदमों से
नाप लेना चाहता है
तारों की आँखमिचौनी से
वह जिद्दी बच्चा
कहाँ हार मानने वाला है
उसे तो अब मजा आने लगा है
अपलक निहारने लगा है
जद्दोजहद को खेल बना लिया है
गायब होकर बाहर निकलने तक
करेगा अहर्निश इंतजार
और झलक पाते ही झट से
गिन लेगा और जीत लेगा
मुट्ठियाँ तान कर बोलेगा
तीन चार पाँच ....।
आसमान को निहारता है
और तारों को गिनता है
एक या एक और दो
टिमटिमाते से तारे को
पकड़ लेना चाहता है
बच्चा है, नादान है
सबकुछ सहेज लेना चाहता है
धरती से आकाश को
नन्हें कदमों से
नाप लेना चाहता है
तारों की आँखमिचौनी से
वह जिद्दी बच्चा
कहाँ हार मानने वाला है
उसे तो अब मजा आने लगा है
अपलक निहारने लगा है
जद्दोजहद को खेल बना लिया है
गायब होकर बाहर निकलने तक
करेगा अहर्निश इंतजार
और झलक पाते ही झट से
गिन लेगा और जीत लेगा
मुट्ठियाँ तान कर बोलेगा
तीन चार पाँच ....।