तब होगी पूजा स्वीकार

नहीं कोई अगर-मगर
मन में न रहे कोई प्यास
रख देना जब चित्त उघाड़
तब होगी पूजा स्वीकार।
भुला कर सारे गिले-शिकवे
हो जाए जब प्रफुल्लित मन
कर देना सर्वस्व समर्पण
तब होगी पूजा स्वीकार।
भेदभाव की बलि चढ़ा कर
नफरतों के मूल जलाकर
जब करो प्रभु का जयकार
तब होगी पूजा स्वीकार।
करुणा के कर में दीप सजाकर
अधरों पर मीठे बोल बसाकर
कर देना जब अहम् समर्पण
तब होगी पूजा स्वीकार।
कर लेना जब आत्मसाक्षात्कार
तज देना मन के विकार
फिर करना दंडवत साष्टांग
तब होगी पूजा स्वीकार।

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