राजा सलहेश नाटक की उद्घोषणा

नमस्कार,
सुधि दर्शक वृन्द, मिथिलांगनक रजत जयंती अर्थात पचीसम बरख में अहाँ सभ के बहुत रास बधाई आ साधुवाद।  ई अहाँ सभक प्रेम आ सहभागिता अइछ जे मिथिलांगन एतबा दिन धरि सक्रिय रूपेँ मैथिलि भाखा आ विभिन्न मैथिलि कला रूप के प्रचार वा प्रसार में भरिसक योगदान द’ रहल अछि।


मिथिलांगनक नाट्य कला यात्रा क’ आजुक प्रस्तुति समर्पित अछि मिथिलाक अनन्य विभूति श्री ब्रज किशोर वर्मा मणिपद्म जी कें, जिनकर जयंती प्रत्येक बरख मिथिलांगन मनबैत आयल अइछ।  ओ तत्वमीमांसी मणिपद्मजी छलाह जे मिथिलाक कतेको धरोहर कला-विधा वा शैली के पहिल बेर लिपिबद्ध केलैन आ सकल समाज में प्रतिष्ठा देबाक प्रयास केलैथ।


सलहेस आ भागता मिथिलांचलक घनघोर ग्रामीण अंचल में एकटा नाच-खेलक रूपेँ प्रचलित रहल अछि। मुदा सलहेसक कथा मात्र नाचे टा नहिं, कखन वर्ग संघर्षक प्रतिनिधित्व कर’ लागैत अछि आ सर्वहारा के प्रतिकार के आवाज बनि सबहक परिपालक राजा सलहेस बनि देवता भ जाइछ से नै बुझना जाइछ! ई लोक-मानसक स्थापना अइछ, जेकरा संकीर्ण वैज्ञानिक तर्क सं सलटाएब संभव नहिं अइछ। एक लोकसमाज के दोसर लोक स्थापना संग केहन विरोधाभाषी चित्रण होइत अइछ एकर प्रमाण अइछ चौधरमल वा चुहरमल जे बाढ़-मोकामा प्रक्षेत्र में, लोक-समाज में, खास तबका में ओतबे प्रचलित अइछ, मुदा धन्य मिथिलाक लोकमन जे राजा सलहेस के आइ धरि भगता में बसा कए सहेजने अइछ।


लोकनाट्य में जतय गायकी व नृत्यक प्रधानता रहैये, नाटककार श्री रोहिणी रमण झा क ई सद्प्रयास छैन जे अभिनय योग्य आयाम जोड़ि कय सामाजिक व द्वंद्वात्मक पहलू के सेहो स्थापित कैल जाय।

त लिय, प्रस्तुत अछि नाटक राजा सलहेस।

प्रस्तुत अछि नाटक ‘राजा सलहेस’. .
मिथिलांगन (रजत जयंती समारोह)
पात्र परिचय - नाटक - राजा सलहेस                दिनांक 9/9/2017


भगता   - रोहित झा
शैला (बच्चा) एवं कनगोजर - निखिल विनय
सोमन व कुलेश्वर - सुरेंद्र झा
बराक - अखिल विनय
करिकन्हा - अजीत झा
अन्हारमाठ   - भरत किशोर
सुयोंक - संजीव बिट्टू
महेश्वर - मुकेश दत्त
सैनिक एक - पुनीत कुमार
सैनिक 2 - कुशाग्र पांडेय
सैनिक 3 - रवि कुमार
कुंटा   - मृत्युंजय चौधरी
सखी - पायल
सत्यवती - हरलीन कौर
हंसा - साक्षी मिश्रा
चौधरमल - राजेश कर्ण
कुसमा - अंकिता झा
सलहेस - अनिल मिश्रा
रूप-सज्जा - दुष्यंत
वस्त्र विन्यास एवं सामग्री संकलन - संजीव बिट्टू
गायन - राखी दास,  रूपम मिश्रा,  रवि मिश्रा, स्नेहा झा
तबला एवं ढोलक - टुनटुन पंडित
बंसी - प्रभाकर
ऑक्टोपैड - जॉन दास
गायन, हारमोनियम सह संगीत विन्यास - सुंदरम
पूर्वाभ्यास प्रभारी - दयाकांत मिश्रा
कोरियोग्राफी - साहिल
लेखक - श्री रोहिणी रमण झा
प्रकाश, मंच परिकल्पना एवं निर्देशन - संजय चौधरी
उद्घोषणा - सुनील कुमार झा

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