बादल आ जा

बादल आ जा
उमस, मेघ बनकर छा गए
और नेह बनकर बरस गये.
तरस गई थीं आँखें, बरस गईं
उम्मीदें मुद्दतों की बदली हो गईं.
फासले जो दरमियाँ थे, सिमट गए
बहाने मुस्कुराने के जो मिल गए.
तोड़कर बंधन रिवाजों के, हम खुले में आ गए
एकबार जो उमंगें बचपन के दिलों पर छा गए.
उमड़-घुमड़कर, मचल-मचलकर यूँ बरसे बादल
इनके 'न आने' तो उनके 'आने' के बहाने बन गए.
बड़े दिनों के बाद, इसबार बादल खुलकर बरसे
खिड़कियाँ और दरवाजे सारे हमने जो खोल दिए
बाग-बगीचे में, सहन और चौबारे में झड़ी झमाझम
मिलाकर ताल, नाचने लगा मन-मयूर छम-छमाछम.
अभी कहाँ भरा था दिल, दिखाकर घनेरे बादल
रोक लिया, मांग लिए खुशियों के कुछ और पल.
शहर है यह मीनारों का, पर्दा है दीवारों का
बिन बरसे न जा, बादल आ जा, आ ही जा.

लगता है कोरोना अब जाने लगा है

  लगता है कोरोना अब जाने लगा है बेचैनी सी हर तरफ छाने लगी है  बंदिशें अब यंत्रणा लगने लगी है  बादल निराशा के गहराने लगे हैं  सड़कों पर वाहन फ...