दिवाली 2017

दिवाली के मेले, हैं सजीं अनंत लड़ियाँ रंगीन
खुशियों के पल, रहे न किसी का मुख मलिन।

अमावस की रात काली, है कहाँ टिकने वाली
जब घर-घर जले, दिये असंख्य, उजाले वाली।

रंग-रोगन, साफ़-सफाई, मन को मोहने वाली
तन की ही नहीं, मन की भी संताप हरने वाली।

लकदक है, चमक दमक है सारे शहर में छाई
आशाओं की, उम्मीदों की फिर से जोत है आई।

मेवों और पकवानों की सौगात लेकर आई है
ठहर सी गयी थी जिंदगी, फिर से बहार आई है।

शुभ दीपावली

**********

अमावस की काली रात है तिमिर गहन छाया है
दीपों की वलय बनी है, प्रकाश जगमगाया है।
अंधेरा भयावह होता होगा, मन को बहुत डराता होगा
टिमटिमाती दीपमालिका मनोरम, किसने सोचा होगा!
झिलमिल सितारे खेलने को उतर आए आसमान से
पुलक उठी विरुदावली, मिलन के मुस्कान से।
श्री और यश का अनुपम मिलन हो आपके घर-द्वार
कामनापूर्ती की रात आती रहे, यूं ही बार-बार।

शुभ दीपावली
*********

जब प्रेम से कृष्ण धारण करना चाहें,
कनिष्ठा पर भी समा जाए,
जब आन पड़े दायित्व गुरुतर,
इंद्र के बज्रों के सम्मुख भी टिक जाए।
सहज और असहज का मिलन ही
गोबर्धन होना होता है।
कहाँ नम्र और कहां अड़ जाना है!
यह विवेक ही गोबर्धन होना है।
सम्मिलन प्रेम, सहृदयता और पराक्रम का
गोबर्धन बन जाना होता है।
जब सुदर्शन भी न आये काम
धैर्य का पर्वताकार होना ही
गोबर्धन बन जाना होता है।
***********

लगता है कोरोना अब जाने लगा है

  लगता है कोरोना अब जाने लगा है बेचैनी सी हर तरफ छाने लगी है  बंदिशें अब यंत्रणा लगने लगी है  बादल निराशा के गहराने लगे हैं  सड़कों पर वाहन फ...