नानाजी


ओह! पता ही नहीं चलता
कब आपकी थपकियाँ देते
कँपकँपाते खुरदरे हाथ
माँ की प्यारी थपकियाँ देती
हाथों में बदल जाती हैं!

अनजाने ही
माँ की यादें भुलाने के लिए
सुनाई जाने वाली कहानियाँ
चुपके से माँ की याद दिला जाती हैं।

हर रोज रात को
उन्हीं कहानियों से निकल कर आती है माँ
आप सोचते हो
आपकी लोरी ने मुझे सुला दिया!

नानी कहती,
जादूगर हैं नानाजी
मैं भी मान लेती हूँ
मैं तो जानती भी हूँ
आपकी इन्हीं कांपते हाथों की सीढियों से
आसमान से उतर आती है
मेरी माँ
और मैं रातभर सोती हूँ
उसकी छाती से लगकर
और तबतक सोती रहती हूँ
जबतक कि दुष्ट जादूगर नहीं आ जाता है
ले जाता है माँ को मुझसे दूर।
क्यों जगाते हो मुझे, नानाजी !
मुझे और भी सोने दो ना नानाजी!
29-01-2018

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