लिखते-लिखते कहानी इक अधूरी छोड़ आए हैं।
परवाह न थी उनको हमारी, हम उनको छोड़ आए हैं।
निकल आए दूर तलक तन्हा चलते-चलते हम
फिर से लौट आने के सारे इरादे छोड़ आए हैं।
शिकायत किससे करें, किस को फुर्सत है सुनने की
अपना दर्द गैरों को सुनाने की आदत छोड़ आए हैं ।
ओ प्यार, ओ मनुहार की बातें अब नहीं होतीं
कल हुई थी तकरार, आज तलाक की अर्जी छोड़ आए हैं।
दोस्ती पर मर मिटने की कसमें अब नहीं खाई जातीं
हर आस्तीन में छुपा कर सांप ढेरों छोड़ आए हैं।
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बयानों की बाढ़ है
भावनाओं का सुखाड़ है
बुलबुलों का शोर है
धार भी तेज है
हवा में जोर है
मगर जाना जरुर है।
परवाह न थी उनको हमारी, हम उनको छोड़ आए हैं।
निकल आए दूर तलक तन्हा चलते-चलते हम
फिर से लौट आने के सारे इरादे छोड़ आए हैं।
शिकायत किससे करें, किस को फुर्सत है सुनने की
अपना दर्द गैरों को सुनाने की आदत छोड़ आए हैं ।
ओ प्यार, ओ मनुहार की बातें अब नहीं होतीं
कल हुई थी तकरार, आज तलाक की अर्जी छोड़ आए हैं।
दोस्ती पर मर मिटने की कसमें अब नहीं खाई जातीं
हर आस्तीन में छुपा कर सांप ढेरों छोड़ आए हैं।
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बयानों की बाढ़ है
भावनाओं का सुखाड़ है
बुलबुलों का शोर है
धार भी तेज है
हवा में जोर है
मगर जाना जरुर है।