रंगीन हुआ वीराना

विषय - चित्रलेखन
विधा - गीत

बड़े प्रेम से लिखकर पाती, तुमने  मुझे  बुलाया
इस निर्जन प्रदेश को किसने, रंगों  से  भरमाया …

धीरे-धीरे साँझ ढली  है,  चहक  रही  है  क्यारी
सपनों की बारात सजी है, महक उठी फुलवारी।
उमंगों की झंकार गुंजित,  प्रीत  छुपाकर  लाया …

धरनी अंबर के मिलने का,  शुभ  अवसर  लगता  है
बिना कहे कुछ भी सबकुछ तो, सुना हुआ लगता है।
दूर-दूर तक दिखे  नहीं  है,  किसी  जीव  की  छाया …

हर तरफ हैं रश्मियाँ पसरी, करतीं ज्यों अभिवादन
बंद आँखों से कर जरा तू,  तृप्ति  भरा  आस्वादन।
दुनिया की नजरों से बचकर, पुष्प  छुपाकर  लाया …

कितना सूना सा था पहले, धरती  का  यह  कोना
तुमने आकर बसा  दिया  है,  करके  जादू  टोना।
रंगों  से  आबाद  हो  गया,   सुंदर  कितनी  माया …

लगता है कोरोना अब जाने लगा है

  लगता है कोरोना अब जाने लगा है बेचैनी सी हर तरफ छाने लगी है  बंदिशें अब यंत्रणा लगने लगी है  बादल निराशा के गहराने लगे हैं  सड़कों पर वाहन फ...