हास्य के दोहे
किस जन्म का पाप किया, भुगत रहा हूँ आज।
पत्नी जाती काम पर, घर का करता काज।।
तरस खाती है हर पल, कहती है शाबास।
हो न जाये चूक कहीं, अटकी रहती साँस।।
देर तक सोती रहतीं, ऐसे उनके ठाट।
गुड ब्वॉय बनकर हम तो, रहें ताकते बाट।।
एक पुकार पर उनके, हम झट से उठ जाँय।
बिन बात हाल पूछते, फिरें पास मँडराय।।
हालत पतली देख कर, आती माँ की याद।
सजल नयन हैं पूछते, कहाँ करूँ फरियाद।।
नन्हीं गुड़िया भी अजब, लेती मम्मा नाम।
दिनभर खेलूँ साथ मैं, मुफ्त गया यह काम।।
भूले-भटके जो कभी, आये कोई मित्र।
जैसे अलबम में लगा, मिले पुराना चित्र।।
किस जन्म का पाप किया, भुगत रहा हूँ आज।
पत्नी जाती काम पर, घर का करता काज।।
तरस खाती है हर पल, कहती है शाबास।
हो न जाये चूक कहीं, अटकी रहती साँस।।
देर तक सोती रहतीं, ऐसे उनके ठाट।
गुड ब्वॉय बनकर हम तो, रहें ताकते बाट।।
एक पुकार पर उनके, हम झट से उठ जाँय।
बिन बात हाल पूछते, फिरें पास मँडराय।।
हालत पतली देख कर, आती माँ की याद।
सजल नयन हैं पूछते, कहाँ करूँ फरियाद।।
नन्हीं गुड़िया भी अजब, लेती मम्मा नाम।
दिनभर खेलूँ साथ मैं, मुफ्त गया यह काम।।
भूले-भटके जो कभी, आये कोई मित्र।
जैसे अलबम में लगा, मिले पुराना चित्र।।