वतन_के_लिए

नमन  तुम्हें  देश  के  वीरों, 
                    ऋणी  तुम्हारा  देश  है।
मिट गये तुम देश की खातिर,
                    आज का यह संदेश है।

माँ की गोदी कितनी उजड़ी,
                    सूनी कितनी माँग हुई।
बहन देखती रह गईं राह,
                    गली गाँव की सून हुई।

आते जाते पूछें राही,
              किस घर का वह वासी था।
पत्थर एक लिखा सरहद पर,
                  वह बस भारतवासी था। ----------

देकर हमको आजादी वह,
                     देखो हो गुमनाम रहा।
अपना फर्ज निभाकर वह तो,
                  बनकर सदा अनाम रहा।

मातृभूमि पर करे निछावर,
                     नसीब नहीं सभी पाते।
देशहित में जी लें जो यहाँ,
                  कम नहीं कर्तव्य निभाते। ---------

साफ-सफाई और सुरक्षा,
                आचरण सही हो जिसका।
कहाँ महत्व कम हुआ उसका,
             बचा विरल गुण यह किसका।

आज तिरंगा बोल रहा है,
                अब लेकर आगे जाओ।
कठिन तपस्या का यह फल है,
                समुचित है मोल चुकाओ। ---------

लगता है कोरोना अब जाने लगा है

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