कहाँ से चले थे कहाँ आ गए हैं
जमाने में देखो ग़ज़ब ढा गए हैं
सताया करें जो सदा ही किसी को
कहर बन के उनपर तभी छ गए हैं
कहा था किसी ने दिखाओ जरा दम
लुटाकर दिलो जान शरमा गए हैं
निगाहें चुरा के अदा जो दिखाते
सभी को पता है किसे भा गए हैं
कहाँ की कहो बात अब हो रही है
सुना है बदल फिर से पाला गए हैं
न थकते कभी थे मुझे देखकर जो
वही आज करके बहाना गए हैं
शिकायत न करना किसी से कभी भी
सुनी'ल आज का सच बतला गए हैं