★ सरसी छंद ★
सीमित है यह धरती अपनी
छोटा है संसार।
है अनंत आकाश यहाँ पर
अद्भुत कारोबार।।
निस्सीम गगन में ही होती है
पंछी की पहचान।
जैसे मस्त बजती बाँसुरी
खींच सुरों की तान।।
भरकर उड़ान सबसे ऊँची
नापें नभ विस्तार।
खग कुल की पहचान यही है
छोटा सा घरबार।।
आश्रय मगर उन्हें चाहिए
लेने को विश्राम।
छोटा सा एक घोंसला हो
जहाँ करे आराम।।
आज़ादी के परवाने हम
मतवाली है चाल।
बंधन कब हैं हमें सुहाते
खटके यही सवाल।।
सीमित है यह धरती अपनी
छोटा है संसार।
है अनंत आकाश यहाँ पर
अद्भुत कारोबार।।
निस्सीम गगन में ही होती है
पंछी की पहचान।
जैसे मस्त बजती बाँसुरी
खींच सुरों की तान।।
भरकर उड़ान सबसे ऊँची
नापें नभ विस्तार।
खग कुल की पहचान यही है
छोटा सा घरबार।।
आश्रय मगर उन्हें चाहिए
लेने को विश्राम।
छोटा सा एक घोंसला हो
जहाँ करे आराम।।
आज़ादी के परवाने हम
मतवाली है चाल।
बंधन कब हैं हमें सुहाते
खटके यही सवाल।।