मच्छड़ बनाम मुच्छड़ संस्कृति!
एक व्यक्ति घर के बाहर बरामदे में बैठा हुआ था। एक मच्छड़ बार-बार उसके चेहरे पर आकर बैठ जा रहा था।
इस बार व्यक्ति का हाथ चेहरे पर लगा और मच्छड़ मारा गया। दूसरे मच्छड़ सोच रहे थे, मरनेवाला शायद
थोड़ा आलसी था या कुछ ज्यादा ही लालच कर गया। ........ मच्छड़ संस्कृति!
इस बार व्यक्ति का हाथ चेहरे पर लगा और मच्छड़ मारा गया। दूसरे मच्छड़ सोच रहे थे, मरनेवाला शायद
थोड़ा आलसी था या कुछ ज्यादा ही लालच कर गया। ........ मच्छड़ संस्कृति!
शर्मा जी के घर कल सी.बी.आई. का छापा पड़ा था। आज शहर भर में उसीके चर्चे हैं। अखबार पर नजरें गड़ाए
वर्मा जी सोच रहे हैं, 'शर्मा जी से चूक कहाँ हुई होगी, वैसे तो बड़े स्मार्ट बने फिरते थे' ! ........ मुच्छड़ संस्कृति!
वर्मा जी सोच रहे हैं, 'शर्मा जी से चूक कहाँ हुई होगी, वैसे तो बड़े स्मार्ट बने फिरते थे' ! ........ मुच्छड़ संस्कृति!