बड़े खिलाड़ी

गुप्ता जी  अपने बड़े खिलाड़ी।
समझे ना  इनको कोई अनाड़ी।

घर  के काम  दफ्तर में  करते।
दफ्तर की झट इधर-उधर करते।
गुप्ता  जी अपने  बड़े खिलाड़ी।
समझे  ना इनको  कोई अनाड़ी।

हँस-हँस  के बोलें जहर  बुझे बोल।
करते रहते सबसे हरदम मोलजोल।
पुरानी गाड़ी लेकर ढूंढें रोज कबाड़ी।  
गुप्ता   जी अपने   बड़े खिलाड़ी।

वैसे तो बनते  हैं शुद्ध शाकाहारी।
फिश फिंगर  पर करते मारामारी।
लाते सब्जी  लेकर सरकारी गाड़ी।
गुप्ता   जी अपने   बड़े खिलाड़ी।

वैसे   तो बड़े   ही मिलनसार  हैं।
मानो रसगुल्ले की खट्टी डकार  हैं।
खा-खा   कर इनकी  फूली हाँड़ी।

गुप्ता   जी अपने  बड़े खिलाड़ी।

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