कष्ट हरो करतार

चित्राधारित रचना

सरसी छंद


हम अबोध हैं  सुनो  हमारी, आज यही अरदास।

कोई न अपना इस जगत में, तुम ही आओ पास ।।


भूल-चूक सब माफ करो तुम, कृपा-सिंधु भगवान ।

हरो विधाता कष्ट सभी अब, लिया बहुत बलिदान ।।


हम अबोध जाने क्या किसके, हाथों हुआ गुनाह ।

हाथ जोड़ प्रभु के सम्मुख हम, रो-रो भरते आह ।।


सही-गलत को तुम ही जानो, हम बालक अंजान।

मात-पिता के बिना जगत यह, कष्टों की है खान ॥


दया करो हे महा-प्रभो अब, दे दो तुम वरदान।

अश्रु-जल से हम करते तर्पण, तुमको दया-निधान॥


हे सर्वज्ञानी, सर्वव्यापी, जीवन के आधार।

बीच भँवर में भटक रही है, कर दो नैया पार॥


पितु-मातु को लिया शरण में, बालक करे पुकार।

बतलाओ अब तुम ही प्रभुजी, क्यों है कष्ट अपार॥

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