एक पल में

अटल नही, अचल नहीं कुछ भी जग में
कितना कुछ बदल जाता है एक पल में।
दो पराये एक पथ पर साथ चल पड़ते हैं
या सब खेल बिगड़ जाता है एक पल में।
अपने जो थे कभी, बेगाने हो जाते हैं
रिश्तों के अर्थ बदल जाते हैं एक पल में।
बदरंग जो दुनियां थी, रंगीन हो जाती है
ख्वाबों के महल बिखर जाते एक पल में।
जन्मों के बंधन यूं ही नहीं बंध जाते हैं
दो दिल जब हो जाते साथ एक पल में।
गगन मुस्काता है, जग चल देता है साथ
मगर कच्चे धागे यूं ही टूट जाते हैं पल में।
रखना पड़ता है रिश्तों को बहुत सम्भालकर
वरना देर नहीं लगती, बिखर जाते हैं पल में।
27.11.2017

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