आशा
रात बहुत अंधियारी है
पर सुबह तो होगी.
उजड़ा चमन, आज पतझड़ है
पर बसंत आने को है.
सर्दी बहुत है, ठिठुर रहे हाथ-पांव
कर लेंगे इंतजार, गर्मी आने को है.
फिसलती रही मंजिलें अब तक आ-आकर पास
तस्वीर साफ है, बस एक और प्रयास.
'हे राम' पर ढेर हो गया महात्मा
राम राज्य की बुनियाद वही है.
है बहुत भागम भाग आज
सुकून भरे दिन आने को हैं.
मत मसलो कोंपलों को आज ही
इनके भी दिन आने को हैं.
चौड़े कंधे कंस के बहुत
मर्दन कर इनका कान्हा मुस्काने को है.
हुई हमारी जग-हँसाई बहुत
अब सम्मान पाने की बारी है.